मंगलवार, 12 मई 2015

विचार बहती हुई नदी के समान होते हैं | जैसे बहती हुई जलधारा अत्यंत निर्मल होती है , ठीक वैसे ही जो विचार निरंतर प्रवाहित होते रहते हैं , वे बिलकुल निर्मल होते हैं | पोखर का जमा हुआ पानी गन्दा हो जाता है पर बहती हुई जलधारा कभी गन्दी नहीं होती |


1 टिप्पणी:

  1. काफी समय हो गये, मैं अपने ब्लॉग पर आया ही नहीं। पर पिछले 3-4 दिनों से अपने ब्लॉग पर आनेका बड़ा मन हुआ। पर जब अपने ही ब्लॉग पर मुझे पहुंचने में दिक्कत हुई तो मैंने अपनी फेसबुक फ्रेंड रश्मि रवीजा से सलाह मांगी। और मैं आज पुनः अपने ब्लॉग पर हूं।

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